Shayri #19

​जरा शरम करो ऐसी परवरिश देने वालों

जो घर के बडोंके साथ ‘फर्नीचर’ जैसा बरतव रखे।

घर के खजिनेको परायों के हातों छोड़ 

क्या उम्मीद रखे बच्चों से बढों की इज्ज़त करने की।

Shayri #17

​हर शक्स का जिंदगी में आना, पनाह लेना।

एक वजह से  ताल्लुक़ और वक्त के दायरे में  है सारा खेल। 

वो शख्स अपनी वजह अमल करें, ओर बस निकल पड़े। 

अपनोंकी बात जब छिड जाए तो कोई ना चाहे  किस्मत को वजह  बनाना इस जुदाई के सिलसिले में ।।

Shayri #16

​क्या गजब जझिरा हैं यह आंखें, यह नजरें। 

उसने तो बस छोड़ दिये दो गोले यूँही शीत समुंदर में।

मगर क्या खुब कहे तमाम लिखावट के करम,

नजरोंकी सैकड़ों अदाओं में, 

फनाह हो चुके कितने नादान।। 

Shayri #14

khuddari ko thukra chuke ho insaani duniya me jeete jeete … 

kisi ka kuch banke.. kisi aur ki marzi se zindagi jine se ubh nahi gaye tum.. 

ek pal bas khud ke liye jeeke to dekho.. khuda ke panah me aur kudrat ki bahon me kabhi ..

 

Kudrat ko mehsus karlo jara….

bas beh jao jara…. 

Kabhi na chahoge insaani duniya me rehna…..